सारंगढ़ बिलाईगढ़

सड़कों पर आवारा मवेशी: एक बढ़ता खतरा देखिए खास रिपोर्ट

सारंगढ़ जिले के नगर पंचायत बरमकेला में आवारा मवेशियों की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। बिलासपुर रोड जनपद के सामने, अटल चौक और सुभाष चौक पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा वाहन चालकों और राहगीरों के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो रहा है। बरसात शुरू होने के बाद यह समस्या और भी विकराल हो गई है, जिससे लोग लगातार दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।


बरसात के मौसम में सड़कों पर मवेशियों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है, जिससे यातायात बाधित हो रहा है। सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा होने के कारण कई बार जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। यह बात ध्यान देने योग्य है कि संबंधित अधिकारियों को इस समस्या की जानकारी होने के बावजूद अभी तक इसे दूर करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।

नगर में आवारा मवेशियों के स्वच्छन्द विचरण से आवागमन बाधित हो रहा है, जिससे राहगीरों को आने-जाने में मवेशियों का भय बना रहता है। पिछले दिनों कलेक्टर धर्मेश साहू ने सुव्यवस्थित यातायात और संभावित दुर्घटनाओं को दृष्टिगत रखते हुए मवेशियों के गले में रेडियम पट्टी लगाकर पकड़ने का निर्देश दिया था। हालांकि, नगर पंचायत के अधिकारी इस निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं। नगर में आवारा मवेशी और बेतरतीब खड़े वाहनों पर नगर पंचायत और पुलिस दोनों की नजर पड़ती है, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है।

शाम को अक्सर चौक-चौराहों में मवेशियों का झुंड रहता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे हटाने के लिए कभी भी आवश्यक कदम नहीं उठाए। कई बार इस झुंड के कारण वाहन चालकों को जल्दबाजी में हादसों का सामना करना पड़ता है। कड़ी कार्यवाही के अभाव में मवेशी मालिकों के हौसले बुलंद हैं और वे अपने मवेशियों को खुला छोड़ देते हैं।

आवारा मवेशियों की समस्या न केवल यातायात को बाधित करती है बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर खतरा है। मवेशियों के सड़क पर विचरण करने से दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। राहगीरों को सड़कों पर चलते समय हमेशा इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि कोई मवेशी अचानक सामने न आ जाए। इस स्थिति के कारण बच्चों और बुजुर्गों के लिए सड़कों पर चलना और भी खतरनाक हो गया है।

इसके अलावा, सड़कों पर मवेशियों के जमावड़े के कारण स्वच्छता भी प्रभावित हो रही है। मवेशियों के मल-मूत्र से सड़कों पर गंदगी फैल रही है, जिससे आसपास के लोगों को स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या विशेष रूप से बरसात के मौसम में और भी गंभीर हो जाती है, जब मवेशियों के मल-मूत्र से सड़कों पर कीचड़ हो जाता है और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

नगर पंचायत के अधिकारियों को इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। सबसे पहले, आवारा मवेशियों को पकड़कर उनके गले में रेडियम पट्टी लगाई जानी चाहिए, ताकि रात के समय वे दिखाई दे सकें और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो सके। इसके अलावा, मवेशी मालिकों को भी इस बात के लिए जागरूक किया जाना चाहिए कि वे अपने मवेशियों को सड़क पर न छोड़ें। यदि वे ऐसा करते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए।

इसके साथ ही, नगर पंचायत को मवेशियों के लिए विशेष आश्रय स्थल की व्यवस्था करनी चाहिए, जहां उन्हें रखा जा सके। इससे सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा कम होगा और यातायात सुव्यवस्थित रहेगा। इसके अलावा, सड़कों पर नियमित रूप से सफाई अभियान चलाया जाना चाहिए ताकि स्वच्छता बनी रहे और संक्रमण का खतरा कम हो।

आवारा मवेशियों की समस्या को हल करने के लिए सामुदायिक सहयोग भी महत्वपूर्ण है। नगर के लोग इस समस्या को समझें और नगर पंचायत के साथ मिलकर समाधान की दिशा में कदम उठाएं। इसके लिए जनजागरूकता अभियान चलाया जा सकता है, जिसमें लोगों को इस समस्या की गंभीरता के बारे में बताया जाए और उन्हें समाधान के लिए सहयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए।

आवारा मवेशियों की समस्या को नजरअंदाज करना अब और संभव नहीं है। इसके लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि नगर पंचायत बरमकेला के निवासी सुरक्षित और सुगम यातायात का लाभ उठा सकें। उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी और मवेशी मालिक इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए त्वरित और आवश्यक कदम उठाएंगे और नगर को आवारा मवेशियों के आतंक से मुक्त करेंगे।

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