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नगरीय निकायों के अध्यक्ष का वित्तीय पॉवर खत्म: सीएमओ को मिला वित्तीय अधिकार

रायपुर
छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में नगरीय निकायों के वित्तीय अधिकारों में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है। इस संशोधन के तहत अब नगरीय निकायों के अध्यक्षों का वित्तीय पॉवर खत्म कर दिया गया है और यह अधिकार मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) को सौंप दिया गया है। यह आदेश अब राजपत्र में प्रकाशित हो चुका है और इसके प्रभाव से नगर निकायों के वित्तीय प्रबंधन में महत्वपूर्ण बदलाव आ गया है।

### संशोधन का मुख्य उद्देश्य

सरकार का यह निर्णय स्थानीय निकायों के वित्तीय संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। कई स्थानों पर वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें मिलने के बाद यह आवश्यक हो गया था कि निकायों के वित्तीय प्रबंधन को सुधारने के लिए कुछ कठोर कदम उठाए जाएं।

### वित्तीय अधिकारों का स्थानांतरण

इस संशोधन के तहत, अब नगरीय निकायों के अध्यक्षों को चेक पर हस्ताक्षर करने का अधिकार नहीं होगा। इसके बजाय, अब यह जिम्मेदारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) को सौंप दी गई है। इस परिवर्तन के तहत सीएमओ को सभी वित्तीय लेन-देन, बजट प्रबंधन, और खर्चों की निगरानी का अधिकार प्राप्त होगा।

### राजपत्र में प्रकाशित आदेश

इस परिवर्तन को लागू करने के लिए सरकार ने एक संशोधन आदेश जारी किया है, जो कि राजपत्र में प्रकाशित किया गया है। इस आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि अब से सभी नगरीय निकायों में वित्तीय निर्णय और भुगतान सीएमओ के हस्ताक्षर से ही मान्य होंगे। यह आदेश सभी नगर पालिकाओं, नगर निगमों और नगर परिषदों पर लागू होता है।

### प्रभाव और प्रतिक्रिया

इस संशोधन का सीधा प्रभाव नगरीय निकायों के संचालन पर पड़ेगा। जहां एक ओर अध्यक्षों की वित्तीय शक्ति खत्म हो गई है, वहीं दूसरी ओर सीएमओ की जिम्मेदारियों में इजाफा हो गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय निकायों के कामकाज को और अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाना है।

### संशोधन के लाभ

1. **पारदर्शिता में वृद्धि**: इस परिवर्तन से नगरीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी। सभी वित्तीय लेन-देन सीएमओ के माध्यम से किए जाएंगे, जिससे अनियमितताओं की संभावना कम होगी।

2. **जवाबदेही में सुधार**: सीएमओ को वित्तीय अधिकार मिलने से उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी। यह व्यवस्था वित्तीय फैसलों के लिए एकल जिम्मेदारी तय करती है, जिससे किसी भी गलती या अनियमितता के मामले में सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।

3. **प्रबंधन में सुधार**: स्थानीय निकायों का वित्तीय प्रबंधन अब और अधिक संगठित और सुव्यवस्थित होगा। इससे विभिन्न परियोजनाओं और योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधनों का उचित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा।

हालांकि, इस बदलाव के साथ कुछ चुनौतियाँ भी सामने आ सकती हैं। मुख्य नगरपालिका अधिकारियों पर बढ़ती जिम्मेदारियों के कारण कार्यभार में वृद्धि हो सकती है, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त संसाधनों और सहयोग की आवश्यकता हो सकती है।

छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन में सुधार के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण कदम है। यह संशोधन नगरीय निकायों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ-साथ वित्तीय अनियमितताओं को रोकने में भी सहायक होगा। राजपत्र में प्रकाशित इस आदेश के प्रभावी होने से नगरीय निकायों के संचालन में महत्वपूर्ण परिवर्तन आएगा और यह निर्णय स्थानीय शासन को अधिक संगठित और प्रभावी बनाने में सहायक होगा।

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