“सुशासन तिहार” पर उठे सवाल: जनता की समस्याओं को लेकर सरकार पर विपक्ष का निशाना

छत्तीसगढ़ में 6 मई 2026 से शुरू हो रहे “सुशासन तिहार” को लेकर सियासत तेज हो गई है। विपक्ष ने इस कार्यक्रम को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे जनता को गुमराह करने का प्रयास बताया है। आरोप लगाया गया है कि सरकार जमीनी हकीकत से दूर होकर केवल योजनाओं का प्रचार करने में लगी हुई है, जबकि आम जनता कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है।
किशोर पटेल अध्यक्ष कांग्रेस कमेटी बरमकेला का कहना है कि प्रदेश में पेंशनधारियों को समय पर पेंशन नहीं मिल रही है, जिससे बुजुर्गों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। वहीं मनरेगा मजदूरों को समय पर मजदूरी स्वीकृति नहीं मिलने से उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को भी समय पर राशि नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
महिलाओं से जुड़ी “महतारी वंदन योजना” को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। केवाईसी के नाम पर महिलाओं को परेशान किए जाने और नई विवाहित महिलाओं के नाम अब तक योजना में नहीं जुड़ने का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया है। शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई गई है। कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते बच्चे केवल मध्यान्ह भोजन लेकर घर लौटने को मजबूर हैं।
किसानों की समस्याओं को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा गया है। धान खरीदी के दौरान किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा, वहीं खाद और बीज की उपलब्धता भी समय पर नहीं हो पाई। धान के भुगतान में देरी से किसान आर्थिक दबाव में हैं।
इसके अलावा नल-जल योजना कई गांवों में प्रभावी नहीं हो पाई है, जिससे ग्रामीणों को पेयजल संकट झेलना पड़ रहा है। गैस सिलेंडर की समय पर आपूर्ति नहीं होने और बिजली कटौती से लोग परेशान हैं। स्मार्ट मीटर को लेकर भी जनता में असंतोष देखने को मिल रहा है।
किशोर पटेल का सवाल है कि जब इतनी समस्याएं बनी हुई हैं, तो सरकार “सुशासन तिहार” के जरिए आखिर कौन सी उपलब्धियां गिनाने जा रही है।



