
बरमकेला |
बरमकेला विकासखंड से सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के उल्लंघन का एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह मामला न सिर्फ एक व्यक्ति के अधिकारों से जुड़ा है, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाता नजर आ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक आवेदक द्वारा बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स सेंटर) कार्यालय से विभिन्न वित्तीय दस्तावेजों—जैसे बिल, वाउचर, कैश बुक एवं अन्य अभिलेखों—की जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई थी। आवेदक ने नियमानुसार 50 का चालान भी जमा किया, ताकि दस्तावेजों का निरीक्षण किया जा सके।
लेकिन आरोप है कि नियमों के विपरीत, आज तक आवेदक को न तो दस्तावेजों का निरीक्षण करने दिया गया और न ही स्पष्ट रूप से कोई जानकारी उपलब्ध कराई गई। इसके उलट, उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर किया जा रहा है।
“जानकारी नहीं, सिर्फ बहाने!”
आवेदक का सीधा आरोप है कि बीआरसी प्रभारी राजकमल पटेल द्वारा जानबूझकर उन्हें गुमराह किया जा रहा है। कभी यह कहा जाता है कि फाइल उपलब्ध नहीं है, तो कभी अधिकारी के व्यस्त होने का हवाला देकर समय टाल दिया जाता है। इस तरह आवेदक को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जा रहा है।
RTI कानून की भावना पर चोट
सूचना के अधिकार अधिनियम का मुख्य उद्देश्य शासन में पारदर्शिता लाना और आम नागरिकों को सशक्त बनाना है, ताकि वे सरकारी कार्यों की निगरानी कर सकें। लेकिन बरमकेला में जो स्थिति सामने आ रही है, वह इस कानून की भावना के बिल्कुल विपरीत है।
यदि आवेदक के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल एक प्रशासनिक लापरवाही होगी, बल्कि यह आम जनता के अधिकारों का खुला उल्लंघन भी माना जाएगा। इससे यह भी सवाल उठता है कि क्या विभाग के भीतर कुछ ऐसा छिपाया जा रहा है, जिसे सार्वजनिक नहीं करना चाहते?
क्षेत्र में आक्रोश, उठी जांच की मांग
इस पूरे मामले को लेकर अब क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि एक साधारण आवेदक को भी उसके अधिकार के तहत जानकारी नहीं मिल पा रही है, तो यह पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।
जनता ने इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।
जिम्मेदार मौन, जवाब का इंतजार
वहीं इस पूरे मामले में अभी तक संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। विभाग की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। यदि विभाग की ओर से स्पष्टीकरण आता है, तो मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
बड़ा सवाल: कार्रवाई या फिर अनदेखी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेकर ठोस कार्रवाई करेगा, या फिर सूचना के अधिकार जैसे मजबूत कानून को यूं ही कमजोर होने दिया जाएगा?
बरमकेला का यह मामला अब सिर्फ एक RTI आवेदन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की असली परीक्षा बन चुका है। आने वाले दिनों में इस पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
राजकमल पटेल के द्वारा कहा गया कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से अवलोकन का आवेदन नहीं दिया नहीं कोई आदेश नहीं दिया गया है।



