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पॉक्सो एक्ट मामले में आरोपी राहुल साहू को 10 वर्ष की सजा, पीड़िता को मिला न्याय

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के थाना सरिया क्षेत्र से जुड़े पॉक्सो एक्ट के एक गंभीर मामले में न्यायालय ने आरोपी को कठोर सजा सुनाते हुए बाल सुरक्षा को लेकर सख्त संदेश दिया है। अमित राठौर की अदालत ने आरोपी राहुल साहू को 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया है। मामले की विवेचना पूर्व थाना प्रभारी प्रमोद कुमार यादव द्वारा की गई थी, जिसके चलते पीड़ित परिवार को न्याय मिल सका।

प्रकरण के अनुसार ग्राम जटीयापाली निवासी राहुल साहू ने 18 वर्ष से कम उम्र की नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। घटना के बाद पीड़िता के परिजनों द्वारा थाना सरिया में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर जांच पूरी की और न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।

जांच में यह प्रमाणित हुआ कि पीड़िता नाबालिग थी, जिसके कारण मामला लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 (पॉक्सो एक्ट) के तहत दर्ज किया गया। न्यायालय ने सभी गवाहों, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास, धारा 87 के तहत 7 वर्ष का सश्रम कारावास तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 4(1) के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं जुर्माने की सजा सुनाई।

न्यायालय ने मामले की गंभीरता एवं संवेदनशीलता को देखते हुए पीड़िता के शारीरिक और मानसिक पुनर्वास के लिए पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के अंतर्गत राज्य शासन को प्रतिकर राशि प्रदान करने की अनुशंसा भी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा नाबालिग की सहमति कानूनन मान्य नहीं मानी जाती।

मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रफुल्ल कुमार तिवारी ने प्रभावी पैरवी करते हुए अभियोजन पक्ष रखा। यह फैसला समाज में बाल सुरक्षा और महिला सुरक्षा को लेकर न्यायपालिका की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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