छत्तीसगढ़ सरकार की 2 साल की उपलब्धियों पर सवाल, धरातल पर जनता अपने हक के लिए सड़कों पर: किशोर पटेल

छत्तीसगढ़ में सरकार के गठन को दो वर्ष पूरे होने पर जहां एक ओर सरकार बड़े-बड़े विज्ञापनों के माध्यम से अपनी उपलब्धियां गिना रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। यह आरोप पूर्व जनपद पंचायत उपाध्यक्ष बरमकेला किशोर पटेल ने लगाए हैं। उनका कहना है कि सरकार की कथित उपलब्धियां केवल कागजों और प्रचार तक सीमित हैं, जबकि आम जनता आज भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है।

किशोर पटेल ने कहा कि गांव से लेकर सदन तक हर वर्ग का व्यक्ति आज अपने हक और अधिकार के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर है। सरकार ने “मोदी की गारंटी” के नाम पर जो वादे किए थे, वे दो साल बीतने के बाद भी अधूरे नजर आ रहे हैं। पंचायत चुनाव संपन्न हुए लगभग नौ महीने हो चुके हैं, लेकिन निर्वाचित सरपंचों को आज तक गांव के विकास और मूलभूत सुविधाओं के लिए मिलने वाली राशि जारी नहीं की गई है। इसके कारण गांवों में सड़क, नाली, पेयजल, साफ-सफाई जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं और इसका खामियाजा सीधे ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल वादों और घोषणाओं तक सीमित रह गई है। “मोदी की गारंटी” के तहत जिन योजनाओं का प्रचार किया गया, उनमें से कई आज भी धरातल पर दिखाई नहीं दे रही हैं। उदाहरण के तौर पर, रसोई गैस सिलेंडर को ₹500 में देने की घोषणा की गई थी, लेकिन आज भी गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार सस्ते सिलेंडर का इंतजार कर रहे हैं। इसी तरह छात्रों और युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया गया था, परंतु बेरोजगार युवा आज भी रोजगार और सहायता के लिए भटक रहे हैं।
किसानों की स्थिति पर भी किशोर पटेल ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खाद की उपलब्धता से लेकर धान बेचने तक किसान परेशान है। टोकन के लिए किसान लगातार परेशान हो रहे हैं और यह मुद्दा आए दिन समाचारों की सुर्खियां बन रहा है। इसके बावजूद सरकार खुद को किसान हितैषी बताने से पीछे नहीं हट रही है।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में जनहितैषी है, तो उसे विज्ञापनों की बजाय जमीनी स्तर पर काम करना चाहिए, ताकि गांव, किसान, युवा और आम आदमी को उनका वास्तविक अधिकार मिल सके।
धान खरीदी को लेकर सेवा सहकारी समिति के नजदीक होने के कारण मिलर व्यापारी के उठाओ जल्दी कर रहे हैं लेकिन दूर धान खरीदी केंद्र में उठाओ नहीं होने के कारण प्रबंधक से लेकर किसान परेशान है।



