छत्तीसगढ़सारंगढ़ बिलाईगढ़

छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था पटरी से उतरी! बच्चों से ज़्यादा ‘कुत्तों’ की निगरानी पर जोर,

छत्तीसगढ़ की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार जहां बच्चों के भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करती है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों को कुत्तों की निगरानी जैसे अजीबोगरीब काम सौंपे जाने से शिक्षकों और अभिभावकों में गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है। सवाल यह है कि क्या सच में सरकारी स्कूलों का ध्यान बच्चों की पढ़ाई से हटकर दूसरी गैरज़रूरी गतिविधियों की ओर अधिक हो गया है?



बीते कुछ वर्षों में सरकारी स्कूलों में नामांकन लगातार घटा है। कई स्कूलों में बच्चों की संख्या 4 से 10 के बीच सिमटकर रह गई है। शिक्षकों का कहना है कि वेतन लाखों का होने के बावजूद शिक्षकों का समय पढ़ाई में कम, और सरकारी कागजी कामों, ऐप अपडेट, रिपोर्ट, निरीक्षण और मध्यान्ह भोजन व्यवस्था में ज्यादा खर्च हो रहा है। स्थिति यह है कि एकल शिक्षक स्कूलों में एक शिक्षक ही पढ़ाई, खाना, रिकॉर्ड, सर्वे और शासन के अन्य आदेशों का पालन करने में दिनभर उलझा रहता है। नतीजा—बच्चों की पढ़ाई सबसे अंत में रह जाती है।

अब इस बीच एक नए आदेश ने विवाद को और बढ़ा दिया है। प्रधान पाठक और प्राचार्यों को स्कूल परिसर में कुत्तों की निगरानी और नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपने की बात सामने आई है। शिक्षकों का सवाल है कि आखिर शिक्षा विभाग का ध्यान बच्चों की सुरक्षा, पढ़ाई में सुधार और स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं की जगह कुत्तों की पहरेदारी पर क्यों है? यदि प्रधान पाठक कुत्तों की निगरानी में लगे रहेंगे तो बाकी शिक्षकों के काम की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? यह आदेश जमीनी हकीकत से कोसों दूर लगता है।

शिक्षकों का मानना है कि यदि सरकार वास्तव में सरकारी स्कूलों को सशक्त बनाना चाहती है तो सबसे पहले एकल शिक्षक व्यवस्था खत्म करनी होगी। हर स्कूल में न्यूनतम दो से तीन शिक्षक अनिवार्य किए जाने चाहिए। साथ ही, शिक्षकों को गैर-शिक्षकीय कार्यों से मुक्त कर पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देना चाहिए। आज हालत यह है कि पढ़ाई से ज्यादा समय दफ्तरी काम और निरीक्षण की तैयारी में जाता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे स्कूल इसलिए आते हैं ताकि उन्हें शिक्षा मिले, भविष्य सुधरे। लेकिन जब स्कूल दिखावे और कागजी खानापूर्ति में ही फंसे रहेंगे तो बच्चों के भविष्य और सरकारी शिक्षा की विश्वसनीयता कैसे बढ़ेगी?

सरकार को चाहिए कि वह जमीनी स्तर पर स्थितियों की समीक्षा करे और शिक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए ठोस कदम उठाए। बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा सर्वोपरि है—कुत्तों की निगरानी नहीं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button