ओ. पी. चौधरी की चुप्पी पर सवाल: अनुसूचित जनजाति बच्चों के स्कूल बंद पर गरमाया मामला

बरमकेला/सरिया – विकासखंड बरमकेला के शासकीय प्राथमिक शाला डिपापारा सरिया के बंद होने से अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चों की शिक्षा पर संकट मंडरा रहा है। युक्तियुक्तकरण के नाम पर इस स्कूल को शासकीय प्राथमिक शाला कन्या सरिया में मर्ज कर दिया गया, जबकि यह मर्जिंग शिक्षा के नियमों के विरुद्ध प्रतीत हो रही है।
डिपापारा सरिया स्कूल के एक किलोमीटर के दायरे में कोई अन्य स्कूल नहीं है। ऐसे में छोटे-छोटे बच्चे भीषण गर्मी और बरसात में इतनी दूरी तय कर पढ़ाई करने कैसे जा पाएंगे? इससे स्पष्ट है कि यह निर्णय न सिर्फ अमानवीय है बल्कि संविधान प्रदत्त शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन भी है।
स्थानीय पालकों और ग्रामीणों ने कलेक्टर को आवेदन देकर मांग की है कि स्कूल को पुनः पूर्ववत प्रारंभ किया जाए। लोगों का कहना है कि बिना भौगोलिक, सामाजिक और शैक्षणिक परिस्थिति का आकलन किए स्कूलों का एकीकरण किया गया है, जिससे जनजातीय बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता दिख रहा है।
जनता का यह भी सवाल है कि क्षेत्रीय विधायक ओ. पी. चौधरी इस गंभीर विषय पर चुप क्यों हैं? क्या अनुसूचित जनजाति के बच्चों के भविष्य से बड़ा कोई राजनीतिक समीकरण है?
अब निगाहें कलेक्टर और शिक्षा विभाग की कार्यवाही पर टिकी हैं कि वे इस अन्याय के खिलाफ क्या कदम उठाते हैं।



