
बरमकेला
भारत में गौ तस्करी एक गहरी चिंता का विषय बन चुकी है, जो न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती पेश करता है, बल्कि धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी इसे लेकर संवेदनशीलता बनी रहती है। हाल ही में, छत्तीसगढ़ के बरमकेला से लेकर बुर्ला तक हुए एक बड़े गौ तस्करी मामले ने इस मुद्दे को एक बार फिर से ज्वलंत बना दिया है। यह घटना न केवल तस्करी के नेटवर्क की क्रूरता को उजागर करती है, बल्कि सुरक्षा और कानून व्यवस्था की खामियों को भी सामने लाती है।
**घटनाक्रम का विवरण**
बीते रात, बरमकेला से सैकड़ों गायों की तस्करी की सूचना मिली, जिसने इलाके में हलचल मचा दी। स्थानीय लोगों ने सूचना दी कि बरमकेला से गायों को एक बड़े पैमाने पर तस्करी के लिए ले जाया जा रहा है। इस पर कार्रवाई करने के लिए मैं, तरुण और देव ने शाम से ही पैकिन ढाबा पर पहुंचकर ट्रकों की निगरानी शुरू की। ढाबा के पास दो कंटेनर ट्रक खड़े मिले—एक CG 04 और दूसरा UP 70 सीरीज का था।
सूचना के अनुसार, ट्रकों में गायों को भरकर बरमकेला से ले जाने की योजना थी। देर रात तक हम ट्रकों का इंतजार करते रहे, लेकिन पहला ट्रक तौसीर मार्ग से कुम्हारी नाला के पास निकलते ही, जब हमने ट्रक को रोकने का प्रयास किया, तो ट्रक ने हमें रौंदने का प्रयास किया और तेजी से भाग निकला।
**कठिन प्रयासों के बावजूद ट्रक का पीछा**
हमने तुरंत डोंगरीपाली के शुभम साहू को फोन किया और ट्रक को रोकने के लिए सहायता मांगी। शुभम और उनकी टीम ने डोंगरीपाली स्कूल के पास मुख्य सड़क पर बैरिगेट लगाकर ट्रक को रोकने की कोशिश की। हालांकि, ट्रक ने बैरिगेट को तेजी से तोड़ते हुए निकलने में सफलता प्राप्त की।
हमने फिर डोंगरीपाली थाना को फोन किया और ट्रक को रोकने का अनुरोध किया। लेकिन ट्रक की गति इतनी अधिक थी कि वह चेक पोस्ट पर लगे बैरिगेट को भी तोड़ते हुए निकल गया। पुलिस की गाड़ी के साथ, हमने सोहेला थाना को भी सूचित किया, लेकिन ट्रक की गति इतनी तेज थी कि वहां भी इसे रोकना संभव नहीं था।
**भयानक घटनाक्रम और पुलिस की प्रतिक्रिया**
ट्रक ने बरगढ़ टोल टैक्स के बैरियर को भी तोड़ते हुए भागने की कोशिश की। टोल की गाड़ियाँ भी हमें ट्रक का पीछा करने में सहायता करने लगीं। आखिरकार, ट्रक ने बुर्ला मार्ग पर जाकर अपनी यात्रा समाप्त की और वहां से चालक और सहयोगी भाग गए।

हमने एक व्यक्ति को पकड़ा और पुलिस के सहयोग से गायों को डोंगरीपाली थाना ले जाया गया। जब कंटेनर खोला गया, तो हमें 70-80 गायें मिलीं, जिनमें से 7 गायें मृत अवस्था में थीं। यह दृश्य न केवल दिल दहला देने वाला था, बल्कि तस्करी के नेटवर्क की क्रूरता और निर्लज्जता को भी दर्शाता था।
**पुलिस की कार्रवाई और सुधार की आवश्यकता**
इस घटना के बाद, पुलिस ने तस्करी के मामले में प्राथमिक कार्रवाई की, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या हम तस्करी के इस नेटवर्क को पूरी तरह से समाप्त कर सकते हैं? क्या हमारी कानून व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र इस तरह की घटनाओं को रोकने में पूरी तरह सक्षम हैं? इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा सुरक्षा और कानून व्यवस्था में कई खामियाँ हैं जिन्हें सुधारने की अत्यंत आवश्यकता है।
**समाज और सरकारी प्रयास**
गौ तस्करी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए समाज और सरकार दोनों को एकजुट होकर प्रयास करने की आवश्यकता है। समाज के प्रत्येक वर्ग को गौ तस्करी के खिलाफ जागरूकता फैलाने, इसके खिलाफ संघर्ष करने और कानून के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की आवश्यकता है। वहीं, सरकार को भी तस्करी के नेटवर्क को खत्म करने और तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
बरमकेला से बुर्ला तक की गौ तस्करी की यह घटना हमें याद दिलाती है कि गौ तस्करी एक गंभीर मुद्दा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस तरह की घटनाओं से न केवल मानवता पर सवाल उठता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि हमारे सुरक्षा और कानून व्यवस्था तंत्र में सुधार की सख्त आवश्यकता है। समाज और सरकार को मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान खोजने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके और मानवता की रक्षा की जा सके।



