जर्जर भवन में पढ़ाई को मजबूर बच्चे: बैगीनडीह प्राथमिक शाला में खतरे की आहट

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड के अंतर्गत आने वाली शासकीय प्राथमिक शाला बैगीनडीह इन दिनों अपनी जर्जर स्थिति को लेकर चर्चा में है। स्कूल भवन की खस्ता हालत के कारण यहां पढ़ाई करना अब बच्चों के लिए खतरे से खाली नहीं है। वर्ष 2005 में रोड किनारे निर्मित यह स्कूल अब पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। छत की हालत इतनी खराब है कि बरसात के दिनों में पानी टपकता है, जिससे कमरे में पढ़ाई कराना असंभव हो गया है।

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि शिक्षक मजबूरी में बच्चों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाने को विवश हैं। लेकिन बरामदा भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। लगातार गिरते प्लास्टर और सीलन से दीवारें कमजोर हो चुकी हैं। यह स्थिति बच्चों और शिक्षकों दोनों के लिए जान का खतरा बन चुकी है। स्कूल के छत को त्रिपल पन्नी से ढका हुआ है।
विद्यालय में वर्तमान में कुल 14 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिनकी पढ़ाई की जिम्मेदारी मात्र दो शिक्षकों पर है। शिक्षकों ने स्कूल भवन की मरम्मत या पुनर्निर्माण को लेकर कई बार संबंधित विभाग को मौखिक और लिखित रूप से सूचना दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। विभागीय उदासीनता के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और साथ ही उनके जीवन पर भी संकट मंडरा रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द स्कूल भवन की मरम्मत कराई जाए या नया भवन निर्मित किया जाए, ताकि बच्चों को एक सुरक्षित और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण मिल सके। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
यह मामला न केवल शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति को उजागर करता है, बल्कि बच्चों के भविष्य को लेकर प्रशासन की गंभीरता पर भी सवाल खड़े करता है।



