
सारंगढ़ / सारंगढ़ जिले अंतर्गत जनपद पंचायत बरमकेला के मुख्य द्वार बगल मे बनाए गए शहीद स्मारक का देख रेख करने वाला कोई नहीं है, इसे बनाया गया था महान स्वतंत्रता सेनानियो को याद करने के लिए और उनके गाथाओ को स्मरण करने के लिए लेकिन यहां शहीद स्मारक का अपमान करने कोई कसर नहीं छोड़ा जा रहा है, पूर्व मे ये स्मारक पुराना जनपद के पास था जिससे यह स्मारक देख रेख के अभाव मे कचड़ा से भरा हुआ था लोग समय समय मे इस स्मारक को पत्थर समझ कर शौच किया करते थे, जिससे लोगो मे चर्चा का विषय बना हुआ था, जिसको लेकर अपमान महसूस करते हुए जनपद उपाध्यक्ष किशोर पटेल, जनपद अध्यक्ष पति अरुण शर्मा सहित अन्य कर्मचारियों ने जनपद मुख्य द्वार पर लगा दिया ताकि इसका सम्मान बना रहे, परन्तु यह शहीद स्मारक जय स्तम्भ 15 अगस्त व 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्व मे सम्मान पाने के लिए तरसता है, कोई इसका सम्मान नहीं करता आखिर क्यों, क्योंकि ये स्मारक क्षेत्रीय स्वंत्रता संग्राम सेनानियों कि स्मारक है इसलिए या कोई और कारण है, आपको आसानी से इस स्मारक के सामने गुटखा पाउज के प्लास्टिक पान कि छेपक व दुर्गन्ध भरी नाली देखने को मिल जाएगा, ।

इसका सम्मान करने आसपास साफ सफाई रखने जनपद मे पदस्थ जिम्मेदार कर्मचारी अधिकारियो को लगातार बोला जा रहा है पर इसपर किसी का ध्यान नहीं है, शहीद स्मारक के अगल बगल आपको कांक्रिट वाली जमीन देखने को मिल जाएगा परन्तु स्मारक लगे स्थान कच्ची है सामने दुर्गन्ध वाली नाली,आप समझ सकते हैं कितना सम्मान है इस स्मारक का, बहरहाल स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने वालों के प्रमुख नाम उनके खुद के क्षेत्रों में बनाए गए जय स्तंभों में अंकित हैं. यह माध्यम से आज की पीढ़ी को याद दिलाया जा रहा है कि गुलामी के दौर में हमारा संघर्ष कैसा था और आजादी के लिए कौन-कौन से महान वीर सेनानी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए थे कुछ दशक पहले पुराना जनपद के पास एक स्मृतिस्तंभ खड़ा किया गया था, जिसमें भारत के राष्ट्रीय चिन्ह के साथ क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानकारी प्रस्तुत की गई थी. इस स्तंभ से हमें स्वाभिमान और सम्मान का भाव स्वतंत्रता संग्राम के वीर संघर्षी लोगों की याद में जीवित रखता है, हालांकि इसकी दिक्कतों के कारण यह उचित रूप से प्रदर्शित नहीं हो पा रहा है. जनपद में अव्यवस्था की समस्या बढ़ रही है,यहां के लोग जय स्तंभ के अस्तित्व की हालत पर बहुत नाराज़ हैं. क्रांतिकारियों से लेकर शहीद जवानों की याद में, विभिन्न स्मारकों का निर्माण जारी है और इन स्मारकों के प्रति सभी का आकर्षण बढ़ता जा रहा है. इन प्रत्येक प्रतीक में राष्ट्रीय भावनाओं का संवादित होने का महत्वपूर्ण योगदान है. जय स्तंभ का मूल्यांकन भी इसी दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए, हालांकि दुर्भाग्यवश स्थानीय स्तर पर उनकी स्थिति आवश्यकताओं के अनुसार कुछ कमजोर है.



