बुदबुदा पंचायत घोटाला: बंद कमरों की ‘जांच’ में भाजपा नेता और सरपंच-पुत्र की दबंगई, कलेक्टर के ‘जनदर्शन’ में गूंजा भ्रष्टाचार का मामला..

15वें वित्त आयोग की राशि में भारी बंदरबांट; बिना जीएसटी के संदिग्ध बिल और फर्जी दस्तखत के साक्ष्यों पर पर्दा डालने की कोशिश; सच लिखने पर पत्रकार हेमंत पटेल को दी जा रही मानसिक प्रताड़ना..
सारंगढ़-बिलाईगढ़
ग्राम पंचायत बुदबुदा में चल रहा 15वें वित्त आयोग की राशि का कथित महाघोटाला अब जिला प्रशासन की साख के लिए अग्निपरीक्षा बन गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले स्थानीय निडर पत्रकार हेमंत पटेल ने आज सीधे कलेक्टर जनदर्शन में दस्तक देकर पूरी जांच प्रक्रिया पर ही गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिला पंचायत के सभाकक्ष में जो जांच निष्पक्ष होनी चाहिए थी, उसे सत्ता और रसूख के दम पर ‘हाईजैक’ कर लिया गया।
सरकारी बंद कमरे में ‘बाहरी तत्वों’ का पहरा
शिकायतकर्ता हेमंत पटेल ने प्रमाणों के साथ आरोप लगाया है कि दिनांक 22 जून 2026 को जिला पंचायत सभाकक्ष में हुई जांच के दौरान नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। जहां एक तरफ तत्कालीन मुख्य आरोपी निर्वाचित महिला सरपंच शिवानी सिदार नदारद रहीं, वहीं उनके स्थान पर उनके पति गौरांग सिदार, वर्तमान सरपंच का पुत्र बबलू उर्फ चंद्रशेखर पटेल और इलाके के एक रसूखदार भाजपा नेता पूरे समय कमरे में कुंडली मारकर बैठे रहे। ये सभी व्यक्ति शिकायत के पक्षकार नहीं थे, फिर भी सरपंच-सचिव के पक्ष में जवाब देते रहे तथा जांच को प्रभावित करते रहे। शिकायतकर्ता की स्पष्ट मौखिक आपत्ति के बावजूद जांच समिति ने इन बाहरी तत्वों को बाहर निकालने की जहमत नहीं उठाई।
महिला सशक्तिकरण और पंचायती राज का उड़ा मजाक
छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम और महिला सशक्तिकरण के दावों की हवा तब निकल गई, जब चुनी हुई महिला जनप्रतिनिधि के बजाय उनके पुरुष रिश्तेदार और राजनीतिक आका अफसरों के सामने बयान दर्ज करा रहे थे। इसके बावजूद जांच समिति द्वारा इस गंभीर हस्तक्षेप पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई, जो सीधे तौर पर जांच की पारदर्शिता पर दाग लगाता है।
सफेदपोशों की नाक के नीचे फर्जीवाड़ा: बिल-वाउचर में भारी गड़बड़ी
जांच के दौरान जो दस्तावेज सामने आए हैं, वे किसी बड़ी वित्तीय साजिश की ओर इशारा करते हैं। हेमंत पटेल द्वारा उठाई गई मुख्य आपत्तियां, जिन्हें कथित रूप से अफसरों ने अनसुना कर दिया, निम्नलिखित हैं:
* बिना जीएसटी के बिल: बिना वैध जीएसटी नंबर के लाखो रुपये के संदिग्ध बिल पंचायत रिकॉर्ड में खपा दिए गए।
* तारीख गायब: अनेक दस्तावेजों और सरकारी वाउचरों पर कोई तारीख अंकित नहीं थी।
* सत्यापन का अभाव: कई वाउचर पर पंचायत का सत्यापन अथवा आवश्यक हस्ताक्षर नहीं थे।
* फर्जी हस्ताक्षर का खेल: लगभग 4 से 5 वाउचरों में राशि प्राप्तकर्ताओं के हस्ताक्षर पूरी तरह फर्जी और कूटरचित प्रतीत होते हैं। यहाँ तक कि खुद सरपंच के हस्ताक्षरों में भी भारी विसंगति पायी गयी है।
* मद बदलकर हेराफेरी: कुछ कार्यों की प्रविष्टि अलग मद में दर्ज थी, जबकि प्रस्तुत बिल किसी अन्य कार्य से संबंधित था।
चौथे स्तंभ पर प्रहार: सच दिखाने पर पत्रकार को प्रताड़ना
भ्रष्टाचार के खिलाफ कलम चलाने की सजा पत्रकार हेमंत पटेल को सामाजिक और मानसिक प्रताड़ना के रूप में मिल रही है। जनहित में जब उन्होंने इस घोटाले की खबरें न्यूज पोर्टलों और समाचार पत्रों में प्रकाशित करवाईं, तो बौखलाए सरपंच पुत्र बबलू पटेल ने सार्वजनिक रूप से विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक व्हाट्सएप समूहों में अभद्र, अमर्यादित और अपमानजनक टिप्पणियां कर पत्रकार की छवि धूमिल करने की घटिया कोशिश की। यह सीधे तौर पर एक स्वतंत्र पत्रकार को डराने और सच को दबाने का कुत्सित प्रयास है।
कलेक्टर से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग: सस्पेंशन और एफआईआर की बारी
इस पूरे प्रशासनिक तमाशे के खिलाफ अब पीड़ित पत्रकार ने देश के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव, पंचायत विभाग के सचिव और बिलासपुर कमिश्नर तक को प्रतिलिपि भेजकर इंसाफ की गुहार लगाई है। आवेदन में सीधे मांग की गई है कि:
* वर्तमान सचिव पंडितराम सिदार एवं तत्कालीन सचिव दौलतराम जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) किया जाए ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें।
* वर्तमान सरपंच लक्ष्मी पटेल के खिलाफ छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत वैधानिक कार्रवाई तुरंत शुरू हो।
* फर्जी बिलों की जांच के लिए वाणिज्यिक कर (GST) विभाग के अधिकारियों और फर्जी हस्ताक्षरों की परतें खोलने के लिए हैंडराइटिंग एक्सपर्ट (FSL) की टीम को शामिल कर उच्च स्तरीय स्वतंत्र पुनः जांच कराई जाए।
* शासकीय राशि का दुरुपयोग, कूटरचना और दस्तावेजों में हेराफेरी प्रमाणित होने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज किया जाए।
* सोमवार को जिला पंचायत सभागार में हुए जांच की सीसीटीवी फुटेज मंगवाकर उक्त जांच की विस्तृत समीक्षा की जाए और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।



