छत्तीसगढ़

*छत्तीसगढ़ के शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है ओडिशा का केदारनाथ शिव मंदिर*

*आम्बाभौना में स्थित स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन के लिए सावन में उमड़ती है हजारों श्रद्धालुओं की भीड़*

*मोहन नायक (पत्रकार)*
        *बरमकेला*

बरमकेला। सावन का पावन महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। पूरे माह शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, वहीं प्रत्येक सोमवार को जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए भक्तों का उत्साह चरम पर रहता है। इसी आस्था का एक प्रमुख केंद्र है ओडिशा के बरगढ़ जिले के आम्बाभौना में स्थित केदारनाथ शिव मंदिर, जहाँ सावन के दौरान छत्तीसगढ़ और ओडिशा से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।



बरमकेला से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित यह प्राचीन शिवधाम अपनी धार्मिक मान्यताओं, प्राकृतिक सुंदरता और चमत्कारी आस्था के कारण वर्षों से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां सुबह से देर रात तक लंबी कतारें लगी रहती हैं। कांवड़िए और शिवभक्त हर-हर महादेव के जयघोष के साथ जलाभिषेक कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

*स्वयंभू शिवलिंग से जुड़ी है प्राचीन मान्यता*

स्थानीय पुजारियों एवं जनश्रुतियों के अनुसार, इस मंदिर में विराजमान शिवलिंग स्वयंभू है। मान्यता है कि जिस स्थान पर आज शिवलिंग स्थापित है, वहां एक गाय प्रतिदिन आकर स्वतः अपने थनों से दूध अर्पित करती थी। जब ग्रामीणों ने यह अद्भुत दृश्य देखा तो उन्होंने उस स्थान की पूजा-अर्चना प्रारंभ कर दी। यह कथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आज भी श्रद्धापूर्वक सुनाई जाती है और श्रद्धालुओं की आस्था का आधार बनी हुई है।

*इतिहास और स्थापत्य भी है आकर्षण का केंद्र*

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण संबलपुर रियासत के राजा बलिहार सिंह द्वारा कराया गया था। मंदिर परिसर में प्राचीन देवी-देवताओं की अनेक दुर्लभ प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जो इसकी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता को और बढ़ाती हैं।

*प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा है शिवधाम*

बरापहाड़ के घने जंगलों की तलहटी में स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य से भी परिपूर्ण है। मंदिर परिसर के आसपास विकसित उद्यान, हरियाली और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराते हैं। धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी यह स्थान लगातार विकसित किया जा रहा है।



*अटूट आस्था का प्रतीक*

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं भगवान शिव अवश्य पूरी करते हैं। यही कारण है कि सावन भर यहां धार्मिक मेले जैसा वातावरण रहता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

सावन के अंतिम सोमवार को यहां श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है। भीड़ के बावजूद भक्तों के चेहरे पर भगवान शिव के दर्शन की उत्सुकता और आस्था स्पष्ट दिखाई देती है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के श्रद्धालुओं के लिए आम्बाभौना का केदारनाथ शिव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि अटूट विश्वास, आध्यात्मिक ऊर्जा और लोकआस्था का जीवंत प्रतीक बन चुका है।

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