*वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर देवगांव में गूंजा राष्ट्रभक्ति का स्वर*

*सरस्वती शिशु मंदिर में हुआ सामूहिक गायन, मुख्य वक्ता मोहन नायक ने बताई राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक महत्ता*
बरमकेला। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर देवगांव में राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया गया, जिससे पूरा विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति के भाव से गूंज उठा।

कार्यक्रम में शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष एवं मुख्य वक्ता मोहन नायक ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास, इसकी रचना की पृष्ठभूमि तथा स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की मातृभूमि के प्रति सम्मान, समर्पण और राष्ट्रप्रेम की भावना का सशक्त प्रतीक है। स्वतंत्रता संग्राम के दौर में इस गीत ने देशवासियों में राष्ट्रीय चेतना और एकजुटता की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि देश के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी ऐसी प्रेरणादायी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने तथा राष्ट्रहित की भावना को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य श्रीराम नायक सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए सामूहिक गायन में सहभागिता की। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों में देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता एवं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति एवं देशप्रेम की भावना के साथ हुआ।




