छत्तीसगढ़सारंगढ़ बिलाईगढ़

बरमकेला में 11 पटाखा दुकानें, सुरक्षा इंतजाम नदारद! घरों और आंगनबाड़ी के बीच बारूद का कारोबार, हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन

अस्थायी लाइसेंस की आड़ में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप, पटाखों के मनमाने दाम से भी उपभोक्ता परेशान; जिला प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल

सारंगढ़ बिलाईगढ़ । दीपावली के पर्व पर जहां बाजारों में रौनक है, वहीं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला में संचालित 11 पटाखा दुकानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, इन दुकानों के आसपास रिहायशी मकान और आंगनबाड़ी केंद्र भी मौजूद हैं। ऐसे संवेदनशील स्थानों पर पटाखों की बिक्री के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर लापरवाही की आशंका लोगों की चिंता बढ़ा रही है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन पटाखा दुकानों में आगजनी जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त अग्निशमन उपकरण और जरूरी सुरक्षा संसाधन उपलब्ध हैं या नहीं? यदि किसी दुकान में अचानक आग लग जाती है और आग आसपास की दुकानों एवं रिहायशी मकानों तक फैल जाती है, तो स्थिति कितनी भयावह हो सकती है, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर दुकानों को अनुमति देने से पहले सुरक्षा मानकों की जांच किस स्तर पर की गई?यदि इन दुकानों को अस्थायी लाइसेंस जारी किया गया है, तो क्या लाइसेंस की शर्तों और निर्धारित सुरक्षा गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित किया गया है? क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया है? आखिर आम नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?वहीं दूसरी ओर पटाखों की कीमतों को लेकर भी उपभोक्ताओं में नाराजगी देखने को मिल रही है। आरोप है कि दुकानदारों द्वारा मनमाने तरीके से पटाखों के दाम वसूले जा रहे हैं। निर्धारित कीमतों और वास्तविक बिक्री दरों के बीच अंतर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में त्योहार की खुशियों के बीच आम लोगों की जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता दिखाई दे रहा है।अब सबसे बड़ा सवाल जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से है कि क्या इन 11 पटाखा दुकानों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जाएगी? क्या अग्निशमन उपकरणों, लाइसेंस की शर्तों और निर्धारित बिक्री मूल्य की पड़ताल होगी? या फिर किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी? त्योहार खुशियों का है, किसी अनहोनी का इंतजार करने का नहीं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए क्या कार्रवाई करता है।

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