*मां शारदा मिनरल्स और मंगल क्रेशर उद्योग के द्वारा पर्यावरण व भंडारण में घोर नियमों का उल्लंघन*

*गुड़ेली टिमरलगा में कई दर्जन अवैध क्रेशर संचालित, केवल कागजों पर वैध*
सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला के प्रसिद्ध गौण खनिज ग्राम पंचायत गुड़ेली टिमरलगा जहां अवैध खनन परिवहन व परिवहन थमने का नाम ही नहीं ले रहा। जिला प्रशासन द्वारा कार्यवाही तो हो रहा है लेकिन लोगों के बीच चर्चा बना हुआ कि केवल कागजों को भरने तथा खानापूर्ति का खेल बताया जा रहा है। अगर अवैध क्रेशर संचालक को जिला प्रशासन का डर होता तो खुले आम नियमों का धज्जियां न उड़ाते, जिस तरह से मंगल क्रेशर उद्योग और मां शारदा मिनरल्स के अवैध क्रेशर संचालित हो रहा है उसे देखते हुए ऐसा प्रति हो रहा कि मानो कि मां शारदा मिनरल्स और मंगल क्रेशर उद्योग के मालिक ही तय करते हैं कि उनको किस प्रकार के क्रेशर संचालित करना है, और स्वयं नियम कर्ता बने है उनको पर्यावरण व खनिज नियमों से कोई लेने देने नहीं अपने आप पर ये खुद अधिकारी मान बैठे हैं। लेकिन गौर करने वाला बात यह भी है कि क्या सारंगढ़ के क्षेत्रीय अधिकारी भी उनको खुला छूट दे रहे हैं? और जो कार्यवाही कर के अपना कार्यवाही को बड़ी बताते है ओ केवल कागजों पर सीमित है? कैसे खनन व क्रेशर माफिया कुछ दिन बाद फिर वही सिलसिला शुरू कर देता है माफियाओं द्वारा बार बार अवैध खनन व क्रेशर संचालित करना मतलब जिला प्रशासन को सीधा चुनौती दे रहे या वो विभागीय मिलीभगत का खेल है।

यह बाते तो हम स्पष्ट नहीं कर सकते ये तो अधिकारी और माफियाओं के बीच का बात है। हां हमे तो सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सालों से खनिज माफिया और विभागीय अधिकारियों की बीच लंबा समय से मिलीभगत होने का बात बताई जा रही है अब तो मंगल क्रेशर उद्योग और मां शारदा मिनरल्स को देखते हुए ये भी सवाल उठता है कि जिला प्रशासन का कार्यवाही या ढोंग? उनके क्रेशर में ना तो प्रदूषण रोकथाम के लिए कोई वृक्षारोपण किया गया है ना ही किसी प्रकार का दीवार है ना ही पानी छिड़काव का व्यवस्था है। क्रेशर पर देखा गया है कि चूना पत्थर की भंडारण की जगह पर कोई सूचना बोर्ड भी नहीं है पत्थर किस लीज से पत्थर खरीदा जा रहा है और किस लीज से सहमति ली गई है तथा भंडारण कितनी है यह सब गुप्त पर्यावरण और खनिज नियमों का खुला उल्लंघन करता है। गुड़ेली टिमरलगा में ऐसे कई क्रेशर है जो केवल और केवल कागजों पर ही वैध है जमीनी हकीकत पर जांच हुई तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, की कैसे विभाग और अवैध क्रेशर संचालकों के द्वारा राजस्व के संपत्ति को खोखले किया जा रहा है और अपने जेब भर जा रहा है। अब देखते हैं की खबर प्रशासन के बाद जिला प्रशासन द्वारा इस पर कोई कार्रवाई होता है या फिर अंधेर नगरी चौपट राजा वाला कहानी बरकार रहेगा।



