छत्तीसगढ़

प्राथमिक शालाओं का फंड बंद, प्रधान पाठक परेशान — शिक्षा व्यवस्था की बुनियादी कड़ी पर ध्यान देने की जरूरत

16 जून, मंगलवार से राज्य के सभी विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है। बच्चों के स्वागत और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के संकल्प के साथ स्कूल खुलेंगे, लेकिन इसी बीच विलय (मर्ज) की गई प्राथमिक शालाओं के सामने एक गंभीर समस्या खड़ी है।

प्राथमिक विद्यालय किसी भी शिक्षा व्यवस्था की पहली और सबसे मजबूत नींव होते हैं। इन्हीं विद्यालयों से बच्चों की सीखने की यात्रा शुरू होती है। मगर वर्तमान में मर्ज की गई प्राथमिक शालाओं के लिए आवश्यक शाला संचालन फंड बंद होने से प्रधान पाठकों के सामने कई व्यावहारिक कठिनाइयाँ उत्पन्न हो गई हैं।

विद्यालय की साफ-सफाई, रंग-रोगन, आवश्यक स्टेशनरी सामग्री, शासकीय आदेशों की फोटोकॉपी, दस्तावेजों का रख-रखाव और रोजमर्रा के छोटे-बड़े खर्चों के लिए जब कोई राशि उपलब्ध नहीं होगी, तो विद्यालयों की नियमित गतिविधियां प्रभावित होना स्वाभाविक है।

शासन द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में प्राथमिक स्तर की शालाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि मजबूत नींव के बिना मजबूत शिक्षा व्यवस्था की कल्पना अधूरी है।

पिछले शैक्षणिक सत्र 2025-26 में भी फंड के अभाव में प्रधान पाठकों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ा था। यदि इस सत्र में भी समय पर राशि जारी नहीं हुई तो सरकारी योजनाओं और विद्यालयीन गतिविधियों के संचालन में बाधाएं आ सकती हैं।

अतः माननीय शिक्षा मंत्री एवं संबंधित अधिकारीगणों से विनम्र आग्रह है कि मर्ज की गई प्राथमिक शालाओं के लिए शाला संचालन फंड शीघ्र जारी करने की दिशा में आवश्यक पहल करें, ताकि विद्यालयों का संचालन सुचारू रूप से हो सके और बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button