छत्तीसगढ़सारंगढ़ बिलाईगढ़

समग्र शिक्षा संकुल केन्द्रों में 80 हजार की राशि का कथित गबन, प्राचार्य–समन्वयक की मिलीभगत पर सवाल

रायपुर/समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत संकुल केन्द्रों को प्रतिवर्ष लगभग 80 हजार रुपये की राशि बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता, खेलकूद सामग्री और स्कूल विकास के लिए प्रदान की जाती है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। आरोप है कि कई संकुल केन्द्रों में यह राशि बच्चों के भविष्य पर खर्च होने के बजाय प्राचार्य और शैक्षिक समन्वयक अधिकारियों की आपसी मिलीभगत से गबन की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार कागजों में बिल–वाउचर तैयार कर ऑनलाइन अपलोड तो कर दिए जाते हैं, लेकिन धरातल पर न तो खेल सामग्री दिखाई देती है और न ही शैक्षणिक संसाधनों में कोई सुधार नजर आता है। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए दी गई राशि का वास्तविक उपयोग न कर उसे अपने परिवारजनों या परिचितों के खातों में स्थानांतरित कर लिया जाता है। इससे न केवल शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले में जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगे जाने के बावजूद भी संबंधित अधिकारियों द्वारा सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। शिक्षित और जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों का आरटीआई जैसे संवैधानिक अधिकार का पालन न करना संदेह को और गहरा करता है। जानकारी न देकर अपने कृत्यों पर पर्दा डालने का प्रयास किया जा रहा है।

आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि किस संकुल केन्द्र ने कितनी राशि का आहरण किया, कितना सही उपयोग हुआ और कितना गबन किया गया। यह राशि मूल रूप से बच्चों के लिए स्कूल सामग्री, खेलकूद, शैक्षणिक गतिविधियों और आधारभूत सुविधाओं पर खर्च की जानी थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सब जानने के बावजूद मौन साधे हुए हैं।

शिक्षा विभाग की इस अनदेखी से सिस्टम में भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता जा रहा है। यदि समय रहते जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो इसका सीधा नुकसान बच्चों के भविष्य को होगा। अब देखना यह है कि प्रशासन और उच्च अधिकारी कब इस मामले को गंभीरता से लेते हैं और कब तक शिक्षा के नाम पर हो रहे इस कथित भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button