
बरमकेला क्षेत्र में इस बार हरेली त्योहार बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। यह त्योहार हर साल की तरह इस बार भी ग्रामीणों के लिए खुशी का अवसर बना। हरेली, छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख त्योहार है जो कृषि और फसल की सुरक्षा के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्यतः फसल की अच्छी पैदावार और किसान के मेहनत की सराहना के रूप में मनाया जाता है।
हरेली का आयोजन सावन मास की अमावस्या को किया जाता है। इस दिन को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला। पूरे क्षेत्र को सजाने और तैयार करने के लिए गांववालों ने मिलकर कई दिन पहले से ही काम शुरू कर दिया था। हरेली की सुबह से ही गांव में उल्लास का माहौल था।
गांव के प्रमुख स्थानों पर हरेली की विशेष पूजा की गई। विशेषकर पूजा के लिए हल, बैल, और अन्य कृषि उपकरणों की साफ-सफाई की गई और उन्हें सजाया गया। ये उपकरण कृषि के महत्व को दर्शाते हैं और पूजा के दौरान उन्हें सम्मान देने का परंपरागत तरीका है। ग्रामीणों ने इन्हें रंग-बिरंगे वस्त्र पहनाए और फूलों से सजाया।
पूजा के बाद, गांव के सभी लोग एकत्रित हुए और सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। इस भोज में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी भोजन जैसे कि चिउड़ा, भाजी, और गुड़ की मिठाई शामिल थी। सभी लोग एक साथ मिलकर भोजन करते हैं और इसे सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है।
हरेली के मौके पर गांव के बच्चे भी विशेष रूप से उत्साहित थे। उन्होंने पारंपरिक गीत गाए और नृत्य किया। बच्चों ने हरेली के उपलक्ष्य में बनाई गई रंग-बिरंगी छवियों और चित्रों के साथ सजावट की। इस दिन, पूरे गांव में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिसमें लोक गीत, नृत्य और नाटक शामिल थे।
हरेली का त्योहार ग्रामीण समाज में एकता और सामूहिकता का प्रतीक है। इस दिन लोग अपने पुराने विवादों को भुलाकर एक दूसरे के साथ मिलकर खुशियाँ मनाते हैं। त्योहार के दौरान स्थानीय पंचायत द्वारा कई खेल-कूद प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिसमें युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
समाप्ति के समय, विशेष पूजा-अर्चना की गई और सभी ने मिलकर भविष्य की फसलों की अच्छी पैदावार की प्रार्थना की। इस त्योहार के माध्यम से किसानों ने अपने मेहनत और समर्पण को मान्यता दी और एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया।
बरमकेला क्षेत्र में हरेली के इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर से साबित कर दिया कि गांवों की सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं का महत्व आज भी बरकरार है। इस त्योहार के माध्यम से ग्रामीणों ने न केवल अपनी परंपराओं का सम्मान किया, बल्कि समुदाय में एकता और भाईचारे को भी बढ़ावा दिया। यह उत्सव सबके लिए एक सुखद और यादगार अनुभव रहा।



