*पुजेरीपाली के प्राचीन केवटीन देउल शिव मंदिर में महा जलाभिषेक एवं भंडारे का आयोजन*

बरमकेला.
छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पुरातात्विक धरोहर केवटीन देउल स्वयंभू शिव मंदिर, पुजेरीपाली में शनिवार, 31 जनवरी को माघ शुक्ल चतुर्दशी के पावन अवसर पर महा जलाभिषेक एवं विशाल भंडारे का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। इस धार्मिक अनुष्ठान में छत्तीसगढ़ एवं पड़ोसी राज्य ओडिशा सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।

*25 वर्षों से निरंतर जारी है सामूहिक जलाभिषेक की परंपरा*
यहां के पुजारी अभिमन्यु गिरी ने बताया कि इस स्वयंभू शिवलिंग मंदिर में विगत 25 वर्षों से सामूहिक प्रयास द्वारा जलाभिषेक (जलशाही) की परंपरा चली आ रही है। आश्चर्य और आस्था का विषय यह है कि शिवलिंग की गोलाकार संरचना को आज तक जल से पूरी तरह भर पाना संभव नहीं हो सका, जो इस मंदिर की एक विशिष्ट और अलौकिक विशेषता मानी जाती है। यही कारण है कि यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
*सुबह से दोपहर तक चला धार्मिक अनुष्ठान*
अनुष्ठान प्रबंधन समिति के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम का यह 25वां वर्ष रहा। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः सुबह 9:00 बजे महा जलाभिषेक से हुई। इसके पश्चात 10:30 बजे बेल वृक्ष पूजन संपन्न कराया गया। दोपहर 1:00 बजे भंडारा प्रसाद वितरण प्रारंभ हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया।

*मंदिर प्रबंधन समिति एवं दानदाताओं की रही अहम भूमिका*
इस सफल आयोजन में मंदिर प्रबंधन समिति, स्थानीय स्वयंसेवकों एवं दानदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति द्वारा व्यवस्था, स्वच्छता, सुरक्षा एवं प्रसाद वितरण की समुचित व्यवस्था की गई, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।
*श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता का संगम*
महा जलाभिषेक एवं भंडारे के इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती दी, बल्कि सामाजिक समरसता और सामूहिक सहभागिता का भी सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया। श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को आध्यात्मिक शांति और पुण्य लाभ का अवसर बताया।




