सारंगढ़ बिलाईगढ़

*बीजेपी शासन में बीजेपी कार्यकर्ताओं की नहीं हो रहे काम तहसीलदार के द्वारा अभद्र दुर्व्यवहार*

**बरमकेला में बीजेपी युवा मोर्चा अध्यक्ष के साथ दुर्व्यवहार*

बरमकेला में बीजेपी युवा मोर्चा अध्यक्ष संजय चौधरी द्वारा जिला समस्या निवारण शिविर के दौरान किसानों की परेशानियों से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा उठाया गया, जो प्रशासनिक लापरवाही और दुर्व्यवहार के कारण चर्चा में है। पटवारी मुख्यालय में अधिकारी के अनुपस्थित रहने से किसानों को हो रही समस्याओं के समाधान के लिए संजय चौधरी ने आवेदन दिया था, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत के बाद, संजय चौधरी और उनके साथियों ने तहसीलदार पुनम तिवारी से इस मामले पर बात की। लेकिन कार्यालय में हुई बातचीत के दौरान, तहसीलदार ने संजय चौधरी और उनके साथियों के साथ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया और दुर्व्यवहार किया। तिवारी ने उन्हें अपने कार्यालय से बाहर कर दिया और धमकी भी दी। इस घटना के बाद बरमकेला में प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ आक्रोश फैल गया है। इस मामले को लेकर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से बीजेपी कार्यकर्ता और किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। यह मामला जिला मुख्यालय तक पहुंच चुका है, और कलेक्टर ने एसडीएम को इस पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। यह देखा जा रहा है कि किसान और बीजेपी कार्यकर्ता दोनों प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं, और तहसीलदार के इस दुर्व्यवहार ने उनकी समस्याओं को और गंभीर बना दिया है।

संजय चौधरी ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास किए हैं, और उनके द्वारा उठाया गया यह मुद्दा प्रशासनिक तंत्र की कमजोरियों को उजागर करता है। तहसीलदार पुनम तिवारी द्वारा किए गए दुर्व्यवहार से यह सवाल खड़ा हो रहा है कि यदि एक प्रमुख बीजेपी कार्यकर्ता के साथ ऐसा बर्ताव हो सकता है, तो आम जनता और किसानों का क्या हाल होगा? किसानों के साथ हो रहे इस तरह के दुर्व्यवहार ने सरकारी अधिकारियों पर लोगों के भरोसे को हिलाया है।

संजय चौधरी का कहना है कि पटवारी मुख्यालय में अधिकारी के अनुपस्थित रहने से किसानों के जमीन से जुड़े काम समय पर नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने इस पर पटवारी के खिलाफ कार्यवाही की मांग की थी, लेकिन जब तहसीलदार ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया, तो उन्होंने इस मुद्दे को जिला प्रशासन के समक्ष उठाने का निर्णय लिया। अब यह मामला कलेक्टर की दहलीज तक पहुंच चुका है, और सबकी निगाहें एसडीएम की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

कलेक्टर द्वारा जांच का आदेश मिलने के बाद उम्मीद है कि इस मामले में न्याय मिलेगा और किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। लेकिन इस घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और आम जनता के मन में यह चिंता बढ़ा दी है कि जब एक पार्टी के कार्यकर्ता को न्याय नहीं मिल पा रहा है, तो आम आदमी की आवाज़ कैसे सुनी जाएगी?

बरमकेला में इस घटना के बाद से प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बढ़ गया है कि वे किसानों और आम नागरिकों की समस्याओं का समय पर समाधान करें, अन्यथा उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

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