प्रदेश सरपंच संघ की प्रथम बैठक सम्पन्न, अधिकार और सम्मान के लिए प्रदेशभर के सरपंच होंगे एकजुट

रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने, सरपंचों के अधिकार एवं सम्मान की रक्षा करने तथा गांवों के विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार देने की मांग को लेकर प्रदेश सरपंच संघ की प्रथम महत्वपूर्ण बैठक पुरखौती मुक्तांगन, रायपुर में सम्पन्न हुई। बैठक में प्रदेश के पांचों संभागों से बड़ी संख्या में सरपंच शामिल हुए। सरपंचों ने एक स्वर में कहा कि पंचायतों पर विकास कार्यों की जिम्मेदारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन उसके अनुरूप अधिकार और संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
बैठक में जिला दुर्ग के युगल किशोर साहू को प्रदेश संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई। वहीं दुर्ग संभाग प्रभारी नरेश शुक्ला, रायपुर संभाग प्रभारी पिंकेश्वर सिन्हा, सहप्रभारी अनिल साहू एवं कोमल ध्रुव, बिलासपुर संभाग प्रभारी एनल घृतलहरे, सरगुजा संभाग प्रभारी तिलक कुमार नायक तथा बस्तर संभाग प्रभारी सोमेश नेताम का चयन किया गया। संगठन ने आगामी दिनों में प्रदेशभर के सरपंचों को जोड़कर प्रदेश स्तरीय संगठन को मजबूत करने का निर्णय लिया।
बैठक में लगभग 21 सूत्रीय मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। सरपंचों ने प्रतिवर्ष तीन लाख रुपये सरपंच निधि देने, ग्राम पंचायतों को 50 लाख रुपये तक के विकास कार्यों में कार्य एजेंसी बनाने तथा बाहरी ठेकेदारी व्यवस्था समाप्त करने की मांग की। प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्र हितग्राहियों को शामिल करने, आवास राशि बढ़ाकर 2.50 लाख रुपये करने, भूमिहीनों को भूमि उपलब्ध कराने और पेंशन हितग्राहियों के चयन में ग्रामसभा को अधिकार देने की मांग भी रखी गई।
15वें एवं 16वें वित्त की राशि में जिला और जनपद स्तर पर होने वाली कटौती समाप्त कर अधिकतम राशि सीधे पंचायतों को देने, वर्तमान जनसंख्या के आधार पर राशि निर्धारित करने तथा ग्रामसभा के प्रस्ताव के आधार पर कराए गए कार्यों में सरपंचों पर अनावश्यक कार्रवाई नहीं करने की मांग की गई।
सरपंच संघ ने गौठानों की शेष राशि का उपयोग ग्रामहित और गौहित में करने का अधिकार पंचायतों को देने, गौधाम योजना शुरू करने, आवारा पशुओं से फसल बचाने के लिए पंचायतों को अतिरिक्त राशि देने, गांवों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने तथा PWD, RES और JJM जैसे विभागों के कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग की।
बैठक में सरपंचों का मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपये, उपसरपंचों का 5 हजार तथा पंचों का 2 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले सरपंचों को पांच हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन तथा आकस्मिक मृत्यु पर एक करोड़ रुपये की बीमा राशि देने की मांग भी रखी गई।
VB-GRAM-G में अवकाश अवधि दो से बढ़ाकर चार माह करने, मजदूरों का भुगतान 15 दिवस में करने तथा रेटिना अटेंडेंस की बाध्यता समाप्त कर वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। SOR की दरों को वर्ष 2025-26 के अनुसार संशोधित करने और अंतिम किश्त का भुगतान 30 दिवस के भीतर सुनिश्चित करने की मांग भी उठी। बिना पंचायत प्रस्ताव के मोबाइल टावर स्थापित नहीं करने, GPDP में ग्रामसभा के प्रस्ताव को सर्वमान्य मानने तथा पंचायतों को वास्तविक वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार देने की मांग की गई।

प्रदेश संगठन प्रभारी युगल किशोर साहू ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति या जिले की लड़ाई नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के गांवों के अधिकार, ग्राम पंचायतों की स्वायत्तता और सरपंचों के सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने प्रदेशभर के सरपंचों से आगामी प्रदेश स्तरीय बैठक में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया।
सरपंच संघ ने स्पष्ट संदेश दिया कि “जिम्मेदारी बहुत दे दी, अब अधिकार भी चाहिए। गांव चलाना है तो ग्राम पंचायत को मजबूत बनाना होगा।” आगामी दिनों में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित कर मांगों और आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।



