कटंगपाली और बोंदा कोटवार मामले में तहसीलदार ने दी स्थिति स्पष्ट, अवैध खनन के कारण हुई थी बर्खास्तगी

सरिया। सरिया तहसील के ग्राम कटंगपाली एवं बोंदा में कोटवार पद से संबंधित मामले को लेकर तहसीलदार सरिया कोमल प्रसाद साहू ने पूरे प्रकरण के तथ्यों की जानकारी दी है। तहसीलदार के अनुसार यह मामला वर्ष 2025 का है। ग्राम कटंगपाली के तत्कालीन कोटवार गोविंद राम चौहान पिता सेवक राम तथा ग्राम बोंदा के तत्कालीन कोटवार बेलाल कुर्रे को शासकीय कोटवारी सेवा भूमि पर अवैध डोलोमाइट खनन के मामले में भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत पदच्युत कर बर्खास्त किया गया था। इसके बाद दोनों ग्रामों में नियमानुसार नए कोटवारों की नियुक्ति की गई।

पूर्व कोटवार गोविंद राम चौहान ने नवीन कोटवार की नियुक्ति को नियम विरुद्ध बताते हुए प्रदेश के वित्त मंत्री के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि फ्लाई ऐश पटवाने से मना करने के कारण उन्हें पद से हटाया गया तथा कोटवार पद की नियुक्ति में उनकी पुत्री को प्राथमिकता नहीं दी गई। हालांकि, बर्खास्तगी आदेश के खिलाफ उनके द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), सारंगढ़ के समक्ष प्रस्तुत अपील खारिज कर दी गई और तहसीलदार के आदेश को यथावत रखा गया।
प्रकरण से जुड़े तथ्यों के अनुसार, पूर्व कोटवार गोविंद राम चौहान के पिता सेवक राम चौहान को भी वर्ष 2015 में कोटवारी भूमि पर अवैध खनन में संलिप्त पाए जाने के बाद तत्कालीन नायब तहसीलदार बरमकेला द्वारा पद से बर्खास्त किया गया था। वहीं, वर्ष 2024 में गोविंद राम चौहान एवं उनके पिता द्वारा स्टाम्प पेपर पर नोटरीकृत शपथ पत्र के माध्यम से कोटवारी भूमि को निजी बताते हुए वहां बने अवैध खदान व गड्ढों के समतलीकरण के लिए सहमति दिए जाने की बात भी सामने आई है।
बोंदा के नए कोटवार डॉक्टर पिता हलधर चौहान की नियुक्ति को लेकर तहसीलदार ने बताया कि मिशल, अधिकार अभिलेख एवं कोटवारी पंजी के अनुसार उनके पिता हलधर चौहान, बड़े दादा चमरा तथा परदादा कुलधर पूर्व में ग्राम बोंदा के कोटवार रह चुके हैं। साथ ही वर्ष 2015 का निवास प्रमाण पत्र भी आवेदन के साथ प्रस्तुत किया गया था।
तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि मामला वरिष्ठ न्यायालय में अपील के रूप में विचाराधीन है। संबंधित पक्ष न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखकर विधिवत अनुतोष प्राप्त कर सकते हैं।



