सारंगढ़ बिलाईगढ़

आश्रम-छात्रावासों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, लापरवाही बर्दाश्त नहीं : कलेक्टर

सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं रखरखाव के लिए 50-50 और 25-25 हजार रुपए की राशि जारी, व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के निर्देश

बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य, पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों के लिए लगेंगी अतिरिक्त कक्षाएं

सारंगढ़–बिलाईगढ़, । जिले में संचालित आदिम जाति विकास विभाग के आश्रम-छात्रावासों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू ने व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के सख्त निर्देश दिए हैं। विभागीय समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि आश्रम-छात्रावासों में विद्यार्थियों की अनुपस्थिति और मूलभूत सुविधाओं में कमी स्वीकार नहीं की जाएगी। बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पौष्टिक भोजन, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और सुरक्षित आवासीय वातावरण उपलब्ध कराना संबंधित अधिकारियों एवं अधीक्षकों की जिम्मेदारी है। राज्य शासन के निर्देशों के अनुपालन में कलेक्टर द्वारा आश्रम-छात्रावासों की सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं रखरखाव संबंधी व्यवस्थाओं के लिए 50-50 हजार तथा 25-25 हजार रुपए की राशि जारी की गई है।
कलेक्टर  ने कहा कि आश्रम-छात्रावासों में बच्चों की वास्तविक उपस्थिति के आधार पर भोजन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, विद्युत व्यवस्था और परिसर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। विद्यार्थियों की सुरक्षा के मद्देनजर संस्थानों में स्थापित सीसीटीवी कैमरों को चौबीसों घंटे चालू रखने तथा उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने अधीक्षकों को निर्देशित किया कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर उदासीनता नहीं होनी चाहिए।


स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने आश्रम-छात्रावासों में नियुक्त चिकित्सकों के माध्यम से विद्यार्थियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने, जांच के लिए निर्धारित कैलेंडर तैयार करने तथा स्वास्थ्य परीक्षण की रिपोर्ट अद्यतन रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों में किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या सामने आने पर तत्काल उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के साथ स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा में कलेक्टर ने कहा कि आश्रम-छात्रावासों में अध्ययनरत प्रत्येक विद्यार्थी की शैक्षणिक प्रगति पर नियमित नजर रखी जाए। पढ़ाई में कमजोर बच्चों को चिन्हांकित कर उनके लिए अतिरिक्त कक्षाएं संचालित की जाएं। शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप अध्यापन कार्य कराने के साथ त्रैमासिक परीक्षा परिणामों का विश्लेषण कर कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाए। अर्धवार्षिक एवं वार्षिक परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम प्राप्त करने के लिए संबंधित शिक्षक और अधीक्षक समन्वय के साथ कार्य करें।
कलेक्टर श्रीमती साहू ने आश्रम-छात्रावासों में संधारित उपस्थिति, भोजन, स्वास्थ्य परीक्षण, सामग्री वितरण, भंडार एवं निरीक्षण सहित सभी आवश्यक पंजियों को नियमित रूप से अद्यतन रखने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसीलदार, जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारियों को क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान संस्थानों का आकस्मिक निरीक्षण करने को कहा। निरीक्षण के समय विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति, भोजन की गुणवत्ता, शैक्षणिक गतिविधियों, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की जांच कर निरीक्षण पंजी में आवश्यक टिप्पणियां दर्ज करने तथा पाई गई कमियों को समयबद्ध ढंग से दूर कराने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि आश्रम-छात्रावास केवल बच्चों के रहने और भोजन की व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। यहां शिक्षा की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षा के साथ बच्चों को अनुशासित एवं सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने अधीक्षकों को राज्य शासन के निर्धारित मापदंडों का कड़ाई से पालन करने, विद्यार्थियों की समस्याओं का संवेदनशीलता से निराकरण करने तथा अपने दायित्वों का पूरी जवाबदेही के साथ निर्वहन करने के निर्देश दिए।
बैठक में आदिम जाति विकास विभाग के सहायक आयुक्त, जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, आश्रम-छात्रावासों के अधीक्षक एवं संबंधित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

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